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Inspirational Chanakya Niti in Hindi-प्रेरणादायक चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य जी राजनीतिक विज्ञानं के महान ज्ञाता थे। वो भारत के शास्त्रीय अर्थशास्त्र के एक महान शिक्षक (Teacher) थे। उनका मौर्य साम्राज्य के विकास और मार्ग दर्शन में बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। साथ ही वह एक महान विचारक  (Thinker)और दार्शनिक (Philosopher) भी थे। उनकी शिक्षाओं को दो पुस्तकों- अर्थशास्त्र (Economics) और चाणक्य नीती (Chanakya Niti) में एक साथ रखा गया है।

उनके महान प्रेरणादायक विचार (Inspirational Thoughts) हर किसी को जीवन, प्रेम, महिलाओं से जुड़े चीजों के विषय में ज्ञान देते हैं। आज उन्हीं में से कुछ महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक चाणक्य नीती आपके लिए हम ले कर आये हैं।

प्रेरणादायक चाणक्य नीति Inspirational Chanakya Niti Quotes in Hindi

1. बुरे चरित्र वाला व्यक्ति:–

यदि किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसका (Loose Character)चरित्र ठीक नहीं है तो उससे दूर रहने में ही समझदारी है। ऐसी लोगों की भलाई करने पर या इनकी मदद करने पर भी हमारा ही नुकसान होना है। ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से समाज और घर-परिवार में श्रेष्ठ व्यक्ति (Best Person) को भी अपमानित होना पड़ता है। जो लोग धर्म से भटक जाते हैं, वे स्वयं तो पाप करते ही हैं और दूसरों को भी पाप के रास्ते पर ले जाते हैं। इसीलिए ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

2.आलस्य को त्याग दे :-

इस दुनिया में बस 21% लोग ही ऐसे होते है जो सफलता की केटेगरी में आते है. पर दूनिया में लोग तो 100% है तो आखिर ये 79% लोग सफल क्यों नहीं होते ? अब आप कहोगे की इन्हें अच्छी परवरिश मिली होगी या इनके बाप – दादा अच्छे घर से होंगे. नहीं गलत, आज ऐसे कई उदाहरण (Examples) है जहाँ लोगो ने जमीन से आसमान की बुलंदियां छुई है.

ऐसे लोग जो गरीब जीवन जीते हुए बहुत अमीर बन गये. इन सब में एक बड़ा अंतर (Diffrence) है आलस्य का. 79% लोग किसी को करने में आलस्य करते है वही 21% लोग उसी काम को बड़ा मन लगाकर करते है. इसलिए जीवन बेहतर और खुशहाल बनाना है तो आलस्य त्यागो और परिश्रम करना सीखो. याद रखो

आलसी मनुष्य का कोई भी वर्तमान और भविष्य नहीं होता.

आलस्य सब कार्यो को दुष्कर और परिश्रम सबको सरल कर देता है.

आलसी सोने वाले मनुष्य को द्ररिद्रता प्राप्त होती है तथा कार्य-कुशल मनुष्य निश्चय ही अभीष्ट फल पाकर ऐश्वर्य का उपयोग करता है.

3.मूर्ख व्यक्ति :-

आचार्य चाणक्य जी ने जिन लोगों से दूर रहने की बात कही है, उसमें पहला व्यक्ति है मूर्ख (stupid,Fool..etc)। यदि हम किसी मूर्ख व्यक्ति को जानते हैं तो उससे दूर ही रहना चाहिए। मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान देने की कोशिश भी न करें। हम मूर्ख को ज्ञान देकर उसकी भलाई करने की सोचते हैं, लेकिन मूर्ख व्यक्ति इस बात को नहीं समझेगा। ये लोग फिजूल तर्क-वितर्क करते हैं, जिससे हमारे समय का नुकसान होगा। इसीलिए ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

किसी मूर्ख व्‍यक्ति की पहचान उसकी वाचालता से होती है, तथा बुद्धिमान व्‍यक्ति की पहचान उसके मौन रहने से होती है।

 

4. हमेशा बिना वजह दुखी रहने वाला व्यक्ति :-

आचार्य चाणक्य जी कहते हैं कि जो लोग अपने जीवन से संतुष्ट नहीं हैं और हमेशा ही दुखी रहते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए। इन लोगों की भलाई करने पर भी हमें दुख ही मिलता है। ऐसे लोगों का जीवन चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो जाए ये हमेशा दुखी रहते हैं। ये लोग दूसरों के सुख से ईर्ष्या करते हैं और कोसते रहते हैं। इस प्रकार ईर्ष्या भाव रखने वाले और बिना वजह दुखी रहने वाले लोगों से भी दूर रहने में हमारी भलाई है।

जो खुद खुश रहते है उनसे दुनिया खुश रहती है

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