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अपनी शक्तियों को विकसित कीजिए

अपनी शक्तियों को विकसित कीजिए

    परमेश्वर ने सबको समान शक्तियाँ प्रदान की हैं, ऐसा नहीं कि किसी में अधिक, किसी में न्यून हो या किसी के साथ खास रियायत की गई हो। परमेश्वर के यहाँ अन्याय नहीं है। समस्त अद्भुत शक्तियाँ तुम्हारे शरीर में विद्यमान हैं। तुम उन्हें जाग्रत करने का कष्ट नहीं करते। कितनी ही शक्तियों से कार्य न लेकर तुम उन्हें कुंठित कर डालते हो। अन्य व्यक्ति उसी शक्ति को किसी विशेष दिशा में मोड़ कर उसे अधिक परिपुष्ट एवं विकसित कर लेते हैं। अपनी शक्तियों को जाग्रत तथा विकसित कर लेना अथवा उन्हें शिथिल, पंगु, निश्चेष्ट बना डालना, स्वयं तुम्हारे ही हाथ में है।

स्मरण रखो, संसार की प्रत्येक उत्तम वस्तु पर तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार है। यदि अपने मन की गुप्त महान् सामर्थ्यों को जाग्रत कर लो और लक्ष्य की ओर प्रयत्न, उद्योग और उत्साहपूर्वक अग्रसर होना सीख लो, तो जैसा चाहो आत्मनिर्माण कर सकते हो। मनुष्य जिस वस्तु की आकांक्षा करता है, उसके मन में जिन महत्त्वाकांक्षाओं का उदय होता है और जो आशापूर्ण तरंगें उदित होती हैं, वे अवश्य पूर्ण हो सकती हैं, यदि वह दृढ़ निश्चय द्वारा अपनी प्रतिभा को जाग्रत कर ले।

अतएव प्रतिज्ञा कर लीजिए कि आप चाहे तो कुछ हों, जिस स्थिति, जिस वातावरण में हो, आप एक कार्य अवश्य करेंगे, वह यही कि अपनी शक्तियों को ऊँची से ऊँची बनाएँगे।

 

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