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Dilo Ki Mithas-दिलो की मिठास


अगर आप खुद के मान-सम्मान को महत्व देते हैं, तो गुणवान लोगों की संगति में रहें. ख़राब संगति रहने से तो अच्छा है कि आप अकेले ही रहें.

जब हम अपनी हदों और सीमाओं को नहीं जानते, तो हम बड़े और ऊँचे काम करके खुद को ही आश्चर्यचकित कर देते हैं. पीछे मुड़ कर देखने पर हैरानी होती है कि क्या मेरी कोई सीमा भी थी. हम सिर्फ उन्हीं सीमाओं से बंधे है, जो हमनें अपने लिए खुद बनायीं है. शिक्षा को अपने ऊपर बंधन मत लगाने दें


बेईमानी की जीत से हार जाना कहीं अच्छा है


खुद को सही आत्मसुझाव दें खुद को सही आत्मसुझाव देने की आदत बनाएँ. आत्मसुझाव हमारे अवचेतन मन को प्रभावित करके हमारी सोच के तरीके को बदलता है और हमारे व्यव्हार में हमारी सोच ही झलकती है. इस प्रकार आत्मसुझाव हमारी सोच के तरीके को प्रभावित करके हमारे व्यव्हार पर असर डालता है. एक तरह से ये आत्मविश्वास जगाने वाली भविष्यवाणियों का रूप ले लेता है. इस तरह के आत्मसुझावों के कुछ उदाहरण ये हैं –
मैं इसे संभाल सकता हूँ
मैं इसे कर सकता हूँ
मैं हिसाब मैं अच्छा हूँ
मेरी यादाश्त अच्छी है


बुराई के जड़ ज़माने के लिए इतना काफी है कि अच्छे लोग कुछ न करें, और बुराई जड़ पकड़ लेगी.


व्यव्हार में चतुर होने का मतलब है है हम अपनें शब्दों का चुनाव समझदारी और होशियारी से करें, और जानें कि हम कितनी दूर तक जा सकते हैं. इसका मतलब यह जानना भी है कि क्या कहना है और क्या नहीं कहना है? व्यव्हार कुशलता कि बिना प्रतिभा हमेशा काम नहीं आ सकती.


सफल लोगों का राज यह है कि वे उन कामों को करने की आदत डाल लेतें हैं, जो असफल लोग करना नहीं चाहते.


अपने को बेहतर बनानें में इतना वक़्त लगाएं कि दूसरों कि आलोचना करनें के लिए समय ही ना बचे